༺कुछ अनकहे अल्फाज़ ➳ PART 2 ༻

मौसम बेहद खूबसूरत था, आसमान मैं बादल छाए हुए थे और हल्की बारिश के साथ साथ ठंडी हवा चल रही थी। चाय पीने का दिल किया तो चाय बनाई, और बालकनी मैं आ के बैठ गया। मौसम बहुत अच्छा था और कुछ अलग जैसा ही एहसास हो रहा था। हाथ मैं चाय का गिलास था और आँखों के सामने एक खूबसूरत नज़ारा। सोचा पुरानी यादों को ताजा किया जाए, तो ऐसे ही अपने बीते हुए कल को याद करने लगा। सच मैं यह एक बहुत अनुभव था पुराने दिनों को याद करने का।

फिर न चाहते हुए पहले प्यार की यादे भी ताजा हो गयी, मैंने अपने आप से वादा किया था कि कभी उसके बारे मैं नहीं सोचूंगा। लेकिन वो क्या कहते हैं कि गलती से मिस्टेक हो गयी। और फिर क्या था वो सारी की सारी यादें दिमाग मैं घूम रही थी। सोचा उसको फोन किया जाये पर फिर ख्याल आया उसको पहले फर्क़ नहीं पड़ा तो अब क्या फर्क़ पड़ेगा। बस यही सोच के मन शांत हो गया, पर दिल अभी भी नहीं मान रहा था।

दिल को शांत करवाने के लिए सोचा चलो आज दिल की बात मान ली जाए, दिल क्या कहना चाहता है उस बात को कागज पर उतारा जाए। बस फिर क्या एक कागज और पेन लिया और कुछ पंक्तियां दिल से बाहर निकल आयी जो आप सभी के साथ साझा कर रहा हू।

वो मेरे लिए बहुत मकबूल था
इसके लिए मुझे उसका हर दर्द कबूल था
मेरी जान की कसम मेरी जान थी वो
और उसके लिए मैं फिजूल था

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मेरी उम्र थोड़ी है इतनी सी उम्र में उम्र से ज्यादा जान चुका हूं
मोहब्बत को तो यार मैं मौत का सामान मान चुका हूं

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मैंने मनाया उसको पर वो मानती ही नहीं…
सलूक वो ऐसा कर रही जैसे मुझको जानती ही नहीं

≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛

बिछड़ना तो एक दिन मुकम्मल था ना साहब, क्योंकि खुद से ज्यादा जो हम उस पे मरते जा रहे थे…
वो शौक बेवफा लोगों का रखते थे
और हम वफा पर वफ़ा करते जा रहे थे…

≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛

जिंदगी कितनी अच्छी होती अगर वो मेरी तरह मेरे से मोहब्बत करती…
जितना मैं उस पर मरता था काश वो भी मेरे पर मरती…

≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛≛

खैर जाने भी दो यारो वो खूबसूरत बहुत थी
बेवफाई ना करती तो और वो क्या करती

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मेरे अलावा उसकी जिंदगी में कोई और भी है यह बात में अच्छे से जानता हूं..
पर तू मुझे देख और मेरी मोहब्बत को देख मैं फिर भी तुझे बेवफा नहीं मानता हूं

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पंक्तिया पूरी पढ़ने के लिए दिल से शुक्रिया

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