༺कुछ अनकहे अल्फाज़ ༻

दोस्तो प्यार तो हर कोई करता है, या यूं कहिये प्यार हो जाता है। शायद आपने भी किया होगा, लेकिन 100 में से सिर्फ 10 लोग ही ऐसे होंगे जिनकी मोहब्बत मुकम्मल हुई होगी। और जो बाकी के 90 लोग है वो या तो मेरी तरह शायरी लिख रहे हैं या फिर उस की याद मैं शायरी पढ़ रहे होंगे।

दोस्तो मोहब्बत मुकम्मल न होने के पीछे सबके बहुत से कारण होंगे , सबकी अपनी अपनी कहानी होगी। लेकिन दोस्तों सभी की मजबूरियाँ नहीं होती, कुछ लोग बस मजबूरी के नाम पर पर आपको छोड़ के चले जाते हैं, और अपने दिए हुए धोखे को छुपाने के लिए मजबूरी का नाम दे देते हैं। यहां पर मेरे को एक पंक्ति याद आ गयी ➳ की साथ निभाने वाले हो तो जनाजे के पीछे जनाज़ा लगा देते हैं, और जो साथ छोड़ने वाले हो वो जनाजे का इंतजार करते है।

दोस्तो जो पहला प्यार होता है वह सबसे खास होता है। न ये प्यार भुलाया जा सकता है और न ही यह दोबारा हो सकता है। आपका पहला हमसफर चाहे कैसा भी रहा होगा, चाहे उसने आपको धोखा ही क्यूँ न दिया होगा। पर उसके लिए वो जो दिल मैं प्यार का एहसास है वो कभी नहीं बदलता।

मुझे एक बात समझ नहीं आती की अंत मैं अगर हमे बिछड़ना ही होता है तो भगवान हमे उनसे मिलाता ही क्यूँ है?

लेकिन आज का जो समय है लगता है मोहब्बत धीरे धीरे जैसे खत्म सी हो रही है सच कहूँ तो ये तमाशा है जिस्मों का, मोहब्बत अब मर चुकी है !! आज के समय की बात की जाए तो खुश वो रहते है जो जिस्म से मोहब्बत करते है, रूह से मोहब्बत करने वालों को अक्सर रोते देखा है !!

हमे जब किसी से प्यार हो जाता है तो हम उस इंसान के लिए एक तरह से पागल हो जाते हैं, हम उस इंसान को अपना भगवान मान लेते हैं और सोचते हैं कि अब जो कुछ है सब कुछ ही यही है। हमारा सिर्फ एक ही मकसद होता है उस इंसान को पाना। उस इंसान के साथ भविश्य के बारे में पता नहीं क्या क्या सोच लेते है और उस इंसान से बहुत ज्यादा उम्मीदे लगा लेते हैं।

यहां पर खास बात यह है कि हम आने वाले कल के बारे में सिर्फ और सिर्फ अच्छा ही सोचते है यानी कि शादी, बच्चे और एक अच्छी जिंदगी। हम सिर्फ वो ही सोचते हैं जिस से हमे खुशी मिले। हम अपने दिमाग में एक कल्पना बना देते हैं कि जो हमने सोचा है आने वाले कल मैं ठीक वैसा ही होगा। लेकिन जब इसका उल्टा हो जाता है तो हमे पता ही नहीं चलता कि अब क्या करना है। पता इसलिए नहीं चलता क्योंकि हमने सिर्फ और सिर्फ अच्छे आने वाले कल के बारे मैं सोचा था, ये तो कभी सोचा ही नहीं कि अगर कल को जब हम बिछड़े तो तब क्या करेंगे। और फिर इंसान फिर धीरे धीरे अंदर से टूटता चला जाता है। और फिर सोचता है मेरे साथ ही ऐसा क्यु हुआ, आखिर हम मिले क्यु, पता नहीं क्या क्या। और ऐसा होना स्वाभाविक भी है क्यूंकि इंसान ने इतनी उम्मीद जो लगायी होती है।

लेकिन यहां पर हम कुछ नहीं कर सकते क्यूंकि मोहब्बत करने से पहले कोई इसके अंजाम के बारे में नहीं सोचता और सोच के जो चीज़ की जाए वो मोहब्बत नहीं साजिश कहलाती है।

और वो कहते हैं ना कि…

ज़हर वेख के पीता..
ते की पीता..?
इश्क सोच के कीता..
ते की कीता..?
दिल दे के दिल लैन दी आस रख्खी वे बुल्लेया..
प्यार वी लालच नाल कीता..
ते की कीता..?


ये थे कुछ अनकहे अल्फाज़ आशा करते हैं कि य़ह चंद पंक्तियाँ आपको जरूर पसंद आई होगी। जल्द ही अगली पोस्ट में आपसे मिलेंगे।

꧁༺धन्यवाद ༻꧂

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